दिलो-जां वतन पे निसार है
दिलो-जां वतन पे निसार है
और जिन्दगी भी निसार है।
करें मौत की परवाह क्या,
हमें अपने देश से प्यार है।।
चाहे बर्फ हो चाहे आग हो,
ये जिन्दगी दाग-दाग हो।
जो वतन के काम न आ सके,
वह तो जिन्दगी ही बेकार है।।
मिटना वतन पर फर्ज है,
मिट जायेंगे हमें गर्ज है।
जो शहीद का रुतबा मिले
तो ये जिन्दगी का श्रृंगार है।।
खातिर वतन की जिया करें,
मरें, तो वतन के लिये मरें।
यही अपने दिल की आवाज है,
यही शौक है यही विचार है।।
जो भंवर भी राह में आयेंगे,
खुद रास्ते बन जायेंगे।
यह कदम “पथिक” जहां रुक गये,
समझो वहीं मंझधार है।।










