बच्चे सीधे सच्चे सारे

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बच्चे सीधे सच्चे सारे

बच्चे सीधे सच्चे सारे
जग की आंखे के तारे।
तुम ही तो नन्हें फूल हो,
जो भगवान को लगते प्यारे ।।

रामकृष्ण भी बच्चे थे,
पर वह कितने अच्छे थे
अति सुन्दर प्यारे-प्यारे,
भक्त जनों के रखवारे
राम ने रावण मारा था,
कृष्ण ने कंस पछाड़ा था
फिर भी उनका यश गाते हैं,
ऋषि-मुनि, नर सारे ।।

छोटा सा प्रह्लाद था,
प्रभु को करता याद था।
हिरण्यकश्यप ने जुल्म किया,
बहुत ही उसको कष्ट दिया ।।

खम्बे साथ लगाया था,
पहाड़ से उसे गिराया था।
किन्तु जिसको सांई राखे,
कौन उसे फिर मारे ।।

ध्रुव बालक ने की भक्ति,
मिली उसे ऊंची पदवी।
नारद ने उपदेश दिया,
मन में ध्रुव ने धार लिया ।।

स्वयं प्रभु चले आये थे,
दर्शन उसे दिखाये थे।
अटल है वो और सब,
चलते हैं आसमान में तारे।।

वन देवी के बच्चे दो,
साथ ऋषि के पले थे वो।
यज्ञ का पकड़ा घोड़ा था,
उन बच्चों ने नहीं छोड़ा था।।

फिर जब हुई लड़ाई थी,
लव और कुश था नाम
विजय उन्हीं ने पायी थी।
उनका, वो थे राम दुलारे ।।