प्रभु-कृपा फिर लाई
प्रभु-कृपा फिर लाई,
संक्रान्ति पर्व सुखदाई
सब को बहुत बधाई,
संक्रान्ति पर्व सुखदाई ।।
यह है पावन पर्व हमारा,
शुरू हुआ ऋषियों के द्वारा।
जिसने शान बढ़ाई ।।…..
पृथ्वी, सूरज, चांद, सितारे,
गति करते सारे के सारे।
यह प्रभु की प्रभुताई ।।….
बीत गया है पौष महीना,
सूरज का रथ रुके कभी ना।
करता रहे चढ़ाई।।…..
माघ महीना खुशियाँ लावे,
मन निर्मल तन शुद्ध बनावे।
मौसम बने सहाई ।।……..
यज्ञ करें सत्संग रचावें,
वेद पढ़ें और वेद पढ़ावें।
होवे सफल कमाई ।।….
आपस में मिल-जुल कर रहना,
यही पथिक जीवन का गहना।
बात समझ में आई ।।…










