हम कहते हैं आदर्श था इंसान था मोहन।

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हम कहते हैं आदर्श था इंसान था मोहन।

हम कहते हैं आदर्श
था इंसान था मोहन।
तुम कहते हो अवतार
था भगवान था मोहन ।।

हम कहते हैं भगवान
का प्रेमी था मुरारी ।
तुम कहते हो था
गोपियों के दर पुजारी।।

हम कहते हैं जो योग
पे शैदाई थी उसकी।
तुम कहते हो कुब्जा से
शनासाई थी उसकी ।।

हम कहते हैं जो कृष्ण
था पैगम्बरो हादी।
तुम कहते हो कपड़ों के
चुराने का था आदी ।।

हम कहते हैं सद्धर्मी था,
गीता का रवैया ।
तुम साफ सुनाते हो
कि था चोर कन्हैया ।।

इन्साफ से कहना
वह इन्सान है अच्छा।
या पाप में डूबा हुआ
भगवान है अच्छा ।।