सब दुनियाँ से वीर बहादुर

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सब दुनियाँ से वीर बहादुर

सब दुनियाँ से वीर बहादुर,
नारी हिन्दुस्तान की।
देश धर्म पर मिटने वाली
मूर्ति है बलिदान की।।

सुनी नहीं क्या अमर कहानी,
उस सीता महारानी की।
जिसका साहस देख-देख,
रावण को हुई हैरानी थी।
सोने की लंका को ठुकराने
वाली थी जानकी ।।

बच्चा बच्चा नाम जानता,
वीर पद्मिनी रानी का देश
धर्म की खातिर जलना,
आग में राजदुलारी का
अमर कहानी छोड़ गयी है,
देवी राजस्थान की।।

पापी मुगलों को दुर्गा ने,
रण में जब ललकारा
था झांसी की रानी ने,
अंग्रेजों को खूब पछाड़ा था।
जिसका साहस देख दीवारें,
कांपी इंग्लिस्तान की ।।

राम-कृष्ण शिवा-प्रताप,
वीरों की वह महतारी थी
जिसने शिक्षा दे पुत्रों को,
बिगड़ी बात संवारी थी।
आप मिट गयी लेकिन,
रखी लाज हमारी शान की।।