सदा सात माताओं का तुम

0
10

सदा सात माताओं का तुम

सदा सात माताओं का तुम,
नाम अदब से लिया करो।
हैं पूजा के योग्य जगत में,
इनकी पूजा किया करो ।।

पहली माता जगदम्बा,
परमेश्वर को बतलाया है सृष्टि का
कर्ता-धर्ता-संहर्ता जो कहलाया है।
योग साधना ध्यान के द्वारा,
प्रभु नाम रस पिया करो।।

जिसने हमको जन्म दिया,
जिसकी गोदी में खेले हैं
सदा हमारी खातिर जिसने,
कष्ट हजारों झेले हैं।
इस जननी की सेवा में,
कर्तव्य समझ कर जिया करो ।।

जिस प्यारी धरती माता ने,
प्यार दिया आधार दिया
खानपान पहरान दिया है,
रत्नों का भण्डार दिया।
तुम अपने बलिदानों से,
इसके जख्मों को सिया करो।।

वेद-ज्ञान गायत्री माता के,
हम पर एहसान ‘बड़े
जिसके उपदेशों से बन गये,
ऋषि-मुनि इन्सान बड़े।
इसका यश फैलाने को निज,
तन-मन-धन सब दिया करो ।।

गौ माता ने दूध पिला कर,
फिर हम सबको पाला है
कृषि जगत् में सब से ज्यादा
अपना हिस्सा डाला है
गौ माता की रक्षा हो,
तुम हर दम कोशिश किया करो।।

मातृभाषा-मातृसभ्यता माताएं
भी याद रहें हमें सदा आबांद किया
है ये भी सदा आबाद रहें।
“पथिक” प्रेम और श्रद्धा से
तुम इन सबका शुक्रिया करो ।।