पत्थर पूजा में सुख है ना मैं जान गयी

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पत्थर पूजा में सुख है ना
मैं जान गयी आर्य समाजियों
का कहना मैं मान गयी।।

इससे अच्छी चाकी हमारी,
खावे हम जिसका पिसेना।
सास-ससुर हैं पूज्य हमारे,
उन की सेवा में रत रहना ।।

संध्या-हवन मैं नित्य करूंगी,
पीरों पे चादर चढ़े ना।
संतोषी माता व्यर्थ का फाका,
अच्छे कर्मों का व्रत लेना।।

पाखण्डी ये भगत सयाने,
अब न डरूंगी मेरी बहना।
कवि राकेश के गीत सुनूंगी,
गन्दे गानों में जी लगे ना ।।