जिस घर में एक दूजे की, बात जाये मानी
जिस घर में एक दूजे की,
बात जाये मानी
उस घर कभी न आये,
कोई भी परेशानी ।।
आकाश में नहीं है,
स्वर्गों की कोई दुनियाँ
बेकार के भरम में,
उलझी हुई है दुनियाँ ।
वही घर है स्वर्ग जिसमें
होती है मधुर वाणी ।।
माता-पिता की सेवा भी
फर्ज है हमारा मां-बाप से
ही जग में नामोनिशां हमारा।
माता-पिता की आज्ञा
जाती जहां पे मानी।।
सन्तान पैदा करके आजाद
छोड़ देते मां-बाप ऐसे इक दिन,
सिर को पकड़ के रोते ।
बच्चों पे शुरू से ही
रखते जो निगहबानी ।।
सन्तान जब बड़ी हो डंडों
से न मनाओ गर्मी को छोड़
कर फिर प्यार को अपनाओ।
जहां प्यार है वहीं पर
सुख-चैन की कहानी।।
मां-बाप बेटे-बेटी
को समान जानते हैं।
छोटे-बड़ों में कोई
न भेद मानते हैं।
हिलमिल जहाँ पे रहती
नन्द-देवरानी-जिठानी ।।
लाओ प्रयोग में ना तराजू
को शादियों में घर फूंक डाले
कितने “विजय” सौदेबाजियों ने
समझें जहाँ बहू को ही
दहेज घर के प्राणी ।।










