जग में वेदों की जब तक निशानी रहे
जग में वेदों की जब
तक निशानी रहे महर्षि
की अमर ये कहानी रहे।।
प्यारा ऋषिवर प्यारा ऋण
इतने हैं ऊपर हमारे,
आसमां में नहीं हैं सितारे,
जन्म सौ बार हो,
ऋण से ना पार हो,
याद उसकी सदा
मेहरबानी रहे।। प्यारा …
सत्यासत्य को तुला पर था तोला,
लुप्त था वेद का भेद
खोला दे गया ग्रंथ खास,
हमें सत्यार्थ प्रकाश,
मेरे पीछे न कोई
परेशानी रहे। प्यारा …..
रात को निद्रा में भी न सोया,
दीन दुःिखयों के दुःख में
था रोया थी ऋषि की पुकार,
मेट दूं अंधकार जग में कुछ दिन
जो मेरी जिन्दगानी रहे।। प्यारा…..
छीन ली क्यूं दीवाली ने ज्योति,
लाख मोती नहीं ऐसा
मोती कर गया है जो काम,
रहे ब्रजपाल नाम,
गंगा यमुना में जब तक
कि पानी रहे। प्यारा….










