महापुरुष जनम लेंगे
महापुरुष जनम लेंगे,
सूना न जहां होगा
गुरु देव दयानन्द सा,
दुनियां में कहां होगा।।
आकाश के आंगन में,
जितने भी सितारे हैं,
इन चांद-सितारों में,
रंगीन नजारे हैं।
तब तक ऐ ऋषि,
तेरा अफसाना बयां होगा …
भूचाल भी आएंगे,
आंधी अंधियारे भी,
तूफान भी आएंगे,
पतझड़ व बहारें भी
महकेगा तेरा गुलशन,
जब दौरे खिजां होगा……
धन रूप माल जर का,
संसार पुजारी है,
गुरु देव दयानन्द ने,
इन्हें ठोकर मारी है।
इस तरह जमाने से
कोई न गया होगा…..
बेदर्द जमाने ने
क्या-क्या न सितम ढाए,
अहसान तेरे ऋषिवर
जायें नहीं गिनवाए।
“बेमोल” ऋषिवर का
नहीं कर्ज अदा होगा….।।










