भारतवासी इतनी जल्दी स्वामी का संदेशा भूल गए
भारतवासी इतनी जल्दी,
स्वामी का संदेशा भूल गए,
झंझोड़ जगाया था जिसने,
तुम उसकी शिक्षा भूल गए ।।
गुरु आज्ञा को सिर धर कर के,
निकला मैदां में कमर कस के
पाखंड मिटाने की ठानी,
सच्चे शिष्य ने हर कीमत पर।
तुम अनुपम त्याग तपस्या और
बलिदान ऋषि का भूल गए ।।
भारत में जहालत फैली थी,
चल रही पाखंड की शैली थी,
चहुं ओर फैला था अंधकार
लोगों की बुद्धि मैली थी।
भूले थे वेदों की शिक्षा और
धर्म-कर्म सब भूल गए ।।
वेदों की ज्योति जगा कर के,
भारत का पुनरुद्धार किया,
दम्भी लोगों की पोल खोल कर,
वैदिक धर्म प्रचार किया,
किन्तु हम उनके अनुयायी,
अपने कर्तव्य को भूल गए।
भारतवासी कुछ होश करो,
क्यों जीती बाजी हार रहे,
धी धाक तुम्हारी दुनिया में,
अब क्यों अपने को मार रहे।
‘निस्तन्द्र’ उजड़ जाओगे तुम,
अगर ऋषिवर प्रतिकूल गए ।।










