ऐ वेदों के राही, स्वामी दयानन्द

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ऐ वेदों के राही, स्वामी दयानन्द

ऐ वेदों के राही, स्वामी दयानन्द,
तेरा जग में आना गजब हो गया,
तू इस जहां में फना हो गया पर,
तेरा दुःख उठाना गजब हो गया।

तूने पिया था जहर का वो प्याला,
और बांटा था जग को नया इक उजाला,
दुःख में भरे इस जहां को ऐ स्वामी,
मारग दिखाना गजब हो गया।

सही आंच तूने सभी संकटों में,
कभी संकटों से न घबराया तूने,
हंस कर तूने सहा संकटों को,
तेरा दुःख ये सहना गजब हो गया।

चारों दिशाओं में छाया अंधेरा,
कहीं पर था छाया बवंडर घनेरा,
कहीं रूढ़िवादी कहीं जाति-पाति,
ये तूफां से लड़ना गजब हो गया।

नैया भंवर में पड़ी थी हमारी,
भूले थे सदज्ञान को नर ओ नारी,
इस देश को प्रेरणा दे के सबको,
तेरा पार लगाना गजब हो गया।

विरजानन्द प्यारा गुरु था निराला,
जो सज्ञान देकर तुझे था उबारा,
साकार सपना गुरु का किया था,
तेरा जग में आना गजब हो गया।