ऋषि कौम का रहनुमा बनके
ऋषि कौम का रहनुमा
बनके आया दुखी बेबसों
का सखा बनके आया।।
अंधेरों ने काबू,
किये थे उजाले
लगाये हुए थे,
दिमागों पे ताले ।
खुली रोशनी का,
दिया बनके आया ।।
निराशा के बादल,
हवा बन उड़ाये
उम्मीदों के फिर से,
चमन मुस्कराए ।
सुहाने सफर की,
सदा बनके आया।।
गुलामी के दिन थे,
गुलामी की रातें
गुलामी के धन्धे,
गुलामी की बातें।
गुलामी का कहरे
खुदा बनके आया।।
यतीमों के घावों पे
मरहम लगाने तड़पते
दिलों को दिलासा दिलाने ।
पथिक दर्दे दिल की
दवा बनके आया ।।










