टंकारा का देव दयानन्द सबकी आंखों का तारा
टंकारा का देव दयानन्द,
सबकी आंखों का तारा
दुनियां का उपकार किया है,
याद करे तुझको जग सारा ।।
तेरे आने से पहले यहां,
अत्याचार हुआ करते
जिस घर में पैदा हो पुत्री,
उस को मार दिया करते।
मातृमान का पाठ पढ़ा कर,
दूर किया उनका दुःख सारा ।।
विधवा और अनाथों की
आंखों से आंसू बहते थे।
दुःख के मारे तड़प-तड़प
कर आहें भर-भर कहते थे
ऐसे दुःखियों के दुःख टारे,
बन करके उनका रखवारा ।।
यवन-ईसाई यत्नशील थे,
आर्य धर्म मिटाने को
भारत माता के शत्रु बन,
इसके टुकड़े कराने को
ऐसे समय में आन बचाया,
ऋषि ने पकड़ के ईश सहारा ।।
ऋषिवर की जय बोलने वालो,
आपस में क्यों लड़ते हो ?
होती है बदनामी सबकी,
उलटे काम क्यों करते हो?
जैसा करोगे वैसा भरोगे,
प्रेमी ऋषिवर का यह नारा ।।










