जय दयानन्द तेरी हम तो करते रहेंगे

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जय दयानन्द तेरी हम तो करते रहेंगे

जय दयानन्द तेरी
हम तो करते रहेंगे
आर्य वैदिक डगर पर
जीते-मरते रहेंगे ।।

अपना निज मान-गौरव
भूली थी हिन्दू जाति सोया
जन-जन जगाने तू ही
लाया था क्रान्ति।
तेरी कुर्बानियों को
याद करते रहेंगे…..।।

शत्रुओं के लिए भी तू
रहा था फरिश्ता हर
दुःखी से निभाया तूने
सचमुच का रिश्ता ।
तेरे ऋण हैं जो हम पर
पूरा करते रहेंगे…..।।

तुझ सा कोई धर्म ज्ञानी
अब तलक तो हुआ ना
वक्त को जो बदल दे
ऐसा कोई कर सका ना।
तेरे चर्चे जुबां पर
सबके आते रहेंगे…. ।।

तू गया जिस चमन से
वो चमन आज भी है
साज जो सो गया था
उसमें आवाज भी है।
तेरे ऋषि इस चमन में
फूल खिलते रहेंगे……।।