बन्दे विचार गन्दे, दिल से निकाल सारे।

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बन्दे विचार गन्दे, दिल से निकाल सारे।

बन्दे विचार गन्दे,
दिल से निकाल सारे।
दे छोड़ कुटिल धन्धे,
सुविचार के सहारे ।।

यदि भद्र सुनना चाहे,
और भद्र देखना भी।
करो शुद्ध भावना को,
पावन पवित्र प्यारे ।।

कुविचार धी बिगाड़े,
मन को करे असंयत है
जीत मन के जीते,
है हार मन के हारे ।।

वह आत्म उन्नति के
पथ का पथिक बनेगा।
व्यवहार शुद्ध रखे,
आचार जो सुधारे ।।

जब पाप-पंक मन को,
कलुषित कभी बनाये ।
तो भक्त कांप जाये,
भगवान को पुकारे ।।

ए बन्दे सम्पदा सब,
सुविचार में समायी ।
गन्दे विचार करके,
क्यों भाग्य को बिगारे ।।