मन जप लें प्रभु के नाम को
मन जप लें प्रभु के नाम को,
वही पार करे नैया ।।
जिसने सूरज-चांद बनाये,
धरती और आकाश बनाया
रेगिस्तान बाग नदी-नाले,
आदि से सृष्टि को सजाया।
कर-कर उसने कमाल दिखाया,
सांची कहूं ‘भय्या।।
मनुष्य जन्म को पाकर भी तू,
मानवता को भूल रहा धन-दौलत
को सब कुछ समझा,
इसके नशे में टूल रहा।
वायदा किया वो याद रहा ना,
सांची कहूं भय्या।।
जिस धन को दिन रात कमाये,
वह धन तेरे साथ न जाये प्राण
लव पर हो जब तेरे,
फिर आंखों में आंसू आये।
समय नहीं मिल पाये टीकम,
सांची कहूं भय्या ।।










