कुछ कर ले रे कर ले

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कुछ कर ले रे कर ले

कुछ कर ले रे कर ले,
मानव जीवन में शुभ
कर्म काम मत कर,
जिसमें हो डर शरम…. ।।

वह छुप-छुप कर मत ऐब
करे वो देख रहा दिन-रैन
सब कर्म कहानी वो ही
करम फल का दाता है
वो सब का सुख-चैन मत
कर मनमानी यह जोबन
जोर जवानी सब ढले-ढले,
चाल सर्प मानव मत चले
चल सोच समझ ले मानव
तेरा क्या है धरम….।।

कर-कर करनी चले गये सब
राजा-रंक फकीर पड़े सबको
जाना देव जनों की संगति
कर ले मन में धर के धीर मिले
अमर ठिकाना ये जनम जनम
का बंधन सब कटे-कटे विपदा
सारी सर की सब हटे-हरे सबका
भला मना ले करके हिरदा नरम……।।

जीवन बगिया महक उठे कुछ
कर ले ऐसे काम मिले सहज
किनार दुर्गुण-दुर्व्यसन तज दे
तो मिल जा सच्चा धाम हो जा
निस्तारा भले काम से मानव मत
डरे-डरे बुरे काम करने से रह
परे-परे जख्म पट्टी कर ले
अभी तो चोट है गरम….. ।।

इस जीवन का सार समझ ले
बरना है बेकार यहां आना तेरा
धर्म-अर्थ और काम-मोक्ष को
ले जीवन में धार हो भव से
पारा ऋषियों की वाणी को ले
मान मान वेद ज्ञान अमृत का
कर पान-पान वेगराज इतना
करने से दूर हो भरम…..।।