प्रभु क्या महान है? हां! है।

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प्रभु क्या महान है? हां! है।

प्रभु क्या महान है? हां! है।
सर्वशक्तिमान है? हां है
करुणा निघान है? हां! है।
बार-बार जन्म लेता,
क्या वो भगवान है ना ना नाना।।

चन्द्रमा की चांदनी में,
जगमगाते तारों में
सूर्य की लाली में और,
पवन की फुहारों में।
लताओं में कलियों में,
क्या सबमें विराजमान है? हां है।।

असंख्यात योनि जन्म जिसने यहां पाया है,
भोग भोगने को तन धार के जो आया है।
जिसका जो आहार वैसा उसपे पहुंचाया है
-क्या सबका निगहबान है? हां है।।

संचित प्रारब्ध क्रियमाण कर्म ज्ञान,
इन्हीं के आधार पर, है जन्म-मरण श्रीमान् ।
यथायोग्य न्यायकर्ता, न्यायकारी
दयावान ऐसा कोई प्रमाण है? हां है।।

रचना विशाल कैसी नियम अनुकूल है।
चतुर है रचैया नहीं कहीं कोई भूल है।
देख ले बेमोल कैसा प्रभु का उसूल है।
वह प्राणियों का प्राण भूल है? हां है।।