चोला बड़ा है कीमती

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चोला बड़ा है कीमती

चोला बड़ा है कीमती,
इसको रुला नहीं पाया है
बड़ी देर से, वृथा गंवा नहीं।।

ये तन मिला था तेरे को प्रभु
याद के लिये मूरख विषयों
की खाक में इसको रुला नहीं।।

बुद्धि मिली थी तेरे को,
पहचान के लिये।
तू रम रहा है खेल में,
समझा जरा नहीं।।

ये मन मिला था तेरे को,
प्रभु दर्शन के लिए।
तू अपने मन की मौज में,
इसको लगा नहीं।।

ईश्वर की प्रेम भक्ति थी,
पारस तेरे लिये तूने
समय बिता दिया,
लोहा छुआ नहीं।।

सौदा किया है घाटे का,
आयु चली गयी।
जीवन की शाम आ
गयी तुझको पता नहीं।।