जिसने रचा है संसार हो
जिसने रचा है संसार हो ऽऽऽ
जिसने आओ मानने से पहले
उसको जान ले।।
जिसने जगत को बनाना
और बनाकर चलाना,
बस उस का ही काम है अवधि
की समाप्ति पर सृष्टि मिटाना,
बस उस का ही काम है।
सर्वशक्तिमान सर्वाधार हो………।।
दूध में घृत और तेल तिलों में,
जिस भांति रमा है इस
सारे जग के अन्दर,
पावन प्रभु उस भांति रमा है।।
सर्वव्यापक निराकार हो…।।
विभिन्न रंगों के फूल लगते हैं प्यारे,
सबमें उसका सुवास है चांद और
सूरज नभ में चमकते सितारे,
सबमें उसका प्रकाश है।
जग का मिटाया अंधकार हो……
बच्चे के जन्म से पहले माता के उर में,
जिसने दूध भर दिया है चींटी से
हाथी तक के भोज का सारा,
जिसने प्रबन्ध किया है।
योगेश जग के भरतार हो….।।










