परमात्मा के सदा गीत गाओ
परमात्मा के सदा गीत गाओ,
तो आवागमन से सदा छूट जाओ।।
वह आनन्द घन है,
सकल दुःख हरय्या पितु-मात वो ही,
सखा और भय्या।
उसी से करो प्रीत,
प्रीतम बनाओ ।। तो….
वो दुःखियों का हमदर्द,
इकलों का साथी श्रुति जगदाधार है,
जिसको अजर है अमर है,
शरण उसकी आओ बताती ।
है गागर में सागर,
भरा वेद वाणी चार ऋषियों द्वारा,
गई जो इसी दीप से,
मन दीपक जलाओ ।।
योगी समाधि में,
जिसको पुकारे जमाने
के वैभव की चाहना बिसारे
उसी से लगन हंस तुम भी लगाओ।। तो….










