हे जगत नियन्ता स्वामी

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हे जगत नियन्ता स्वामी

हे जगत नियन्ता स्वामी,
घट-घट के अंतर्यामी
तुम ओम् नाम के नामी,
भारत उद्धार करो न्यायकारी ।।

संसार तेरी फुलवारी,
तुम हो इसके हितकारी।
भारत पर मुसीबत भारी,
संकट संहार करो न्यायकारी ।।

हे अद्भुत जगत् रचैया,
मंझधार डोल रही नैया ।
अब तुम बिन कौन खिवैया,
ये बेड़ा पार करो ।।

अरि दल ने डेरा लगाया,
छाया है घोर अंधेरा।
अब सिर्फ आसरा तेरा,
दुःखों से पार करो ।।

जो गलती हुई हमारी,
उसे माफ करो न्यायकारी।
कहे भीषम विनय हमारी,
प्रभु स्वीकार करो न्यायकारी।।