जिसने भी परमेश्वर का ध्यान किया है

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जिसने भी परमेश्वर का ध्यान किया है

जिसने भी परमेश्वर का ध्यान किया है,
बस उसी ने ईश्वर को मान लिया है-
प्राणी रे……..।।

जहां बहती है सत्संग की धारा,
वहां मिलता है वो मोक्ष द्वारा।
जिसने भी इस गंगा में स्नान किया है……।।

कोई भूखे को भोजन,
कोई नंगे को कपड़ा उढ़ाये।
जिसने भी इन लोगों को दान दिया है……।।

दो मिलन की ये बेमोल लहरें,
साम के स्वर हों सागर से गहरे।
जिसने भी विद्वानों का सत्कार किया है…..।।