ऐसी कृपा हो भगवन

0
25

ऐसी कृपा हो भगवन

ऐसी कृपा हो भगवन,
जब प्राण तन से निकले
प्रिय ओ३म्-ओ३म् कहते,
यह प्राण तन से निकले ।।

वेदों के मन्त्र पावन,
कर दें पवित्र तुझको ।
हो ब्रह्मज्ञान मन में,
जब प्राण तन से निकले ।।

गायत्री मन्त्र गाऊँ,
ध्वनि ओम् की सुनाऊँ।
मन में तुम्हें ही पाऊं,
जब प्राण तन से निकले ।।

चैतन्य ब्रह्म व्यापक,
जिसके कि हम उपासक ।
होवे वही प्रकाशक,
जब प्राण तन से निकले ।।

विषयों को भूल जाऊं,
दुःख अंत में न पाऊं।
इक आपको ही ध्याऊं,
जब प्राण तन से निकले।।

सब कर्म फल तुम्हीं को,
करता हूं मैं समर्पित।
भगवन उवार लेना,
जब प्राण तन से निकले ।।