आधार है सब का आधार है
आधार है सब का आधार है
प्रभु सृष्टि का सिरजनहार है।।
ब्रह्मा वही है और विष्णु वही है,
जगदीश प्यारा वही तो विभु है।
वह तो सबमें रमा ओंकार है
आधार है……..।।
सबमें है व्यापक और सबसे अलग है,
मेंहदी में लाली महकता सुमन है।
ऐसा प्रभु मेरा निराकार है
आधार है……….।।
कौड़ी व कुंजर सभी को है पाले
वह तो सब का ही प्राणाधार है
वेद पुकारे छः शास्त्र पुकारे बस
में उसी के अंधेरे-उजाले ।
आधार है……….।।
योगी-मुनि सब गा-गा के हारे।
फिर भी पाया किसी ने न पार है
आधार है……..।।
निर्मल हृदय से प्रभु को पुकारो
प्रातः व सायं ओम् उचारो।
समझो उसको ही सर्वाधार है….
आधार है…..।।










