प्रभु हर दिल में वास करता है

0
18

प्रभु हर दिल में वास करता है

प्रभु हर दिल में वास करता है,
जरें-जरें में वह समाया है।
उसकी महिमा को जानते ही नहीं,
जिसने संसार ये बनाया है।।

नीले नभ में ये सितारे देखो,
बड़े रंगीन नजारे देखो
चांद-सूरज के इशारे देखो,
बहती वायु के फव्वारे देखो
कहीं बादल की गरज,
कहीं बिजली की लरज,
ये करिश्मा भी क्या दिखाया है।।

लाखों रंगों से ये रंग दीने सुमन,
जिनकी खुशबू से महकता है चमन
पत्ते-पत्ते की अलग है कतरन,
वाह रे जगदीश तुझे है धन्य-धन्य ।
फूल-पत्ती व लता दे रहीं तेरा पता,
सबके आंचल में तू समाया है।।

ऊँचे शैलों की निराली सी छटा,
जिनपे छायी है सुनहरी ये घटा
कहीं ऊँचे हैं बरफ के टोले सुर्ख
अग्नि की कहीं जलती लटा।
कहीं नदियों का मिलन
कहीं सागर ने नमन,
तुझे करने को सर झुकाया है।।

सारी सृष्टि को रचाने वाला,
सबको दुःखों से बचाने वाला
पापी दुष्टों को रुलाने वाला,
नित नये नाच नचाने वाला।
कोई क्या जान सके
नहीं पहचान सके,
बड़ी बेमोल उसकी माया है।