यह कण-कण सृष्टि का पता उसका देता
यह कण-कण सृष्टि का पता उसका देता
जिसको पुकारे
ओम नाम वह रे गाता है
अमर गान सभी को देता है,
नहीं कुछ लेता है,
आप सदा निष्काम……।।
सत् चित्त आनन्द है,
ये वेदों ने बतलाया है
निर्दोष तभी तो,
वह निर्विकार कहलाया
रम रहा हर जगह,
हर जगह जैसे है आसमान…..।।
रोग शोक व्याकुलता,
उसको ना कभी मिटाये
सदा स्वस्थ सुख देकर
वह पल में कष्ट उठाये
अजर है अमर है-अमर है,
हरदम रहे जवान……।।
निर्भय रहता है वह,
ना तूफानों से डरता है
काल बन्दी उसका है,
हर वेले पानी भरता है
है गति पा रहा-पा रहा,
उससे सकल जहान….
रातों की स्याही में,
वह चांद की शीतलता
में वह ही तो है देखो,
सूरज की ग्रीष्मता में।
हर समय वो प्रभु-वो प्रभु,
रहता है वर्तमान…..।।
नेति-नेति कह कर सब,
ऋषि-मुनि हैं हारे
कलाकार है भारी,
उसके हैं खेल न्यारे।
हंस भी चकित है-चकित है,
लख कर कला महान।।










