वीरों दुष्ट जनों से डरना क्या।

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वीरों दुष्ट जनों से डरना क्या।

वीरों दुष्ट जनों से डरना क्या।
स्वाभिमान से हमने सीखा,
जीना क्या और मरना क्या।
अन्यायी के सन्मुख अड़ना,
देश के गद्दारों से लड़ना।
आततायी गुण्डों के आगे,
जाकर नाक रगड़ना क्या।। वीरों…

देश धर्म के हैं दीवाने,
जल जाते हैं क्यों परवाने।
कायर बुजदिल भीरू बनकर,
जीकर के भी करना क्या।। वीरों…

तिरछी आंख उठायेगा जो,
मुंह की एक दम खायेगा वह।
बात-बात पर पंचशील के,
चक्कर में है पड़ना क्या।। वीरों…

देश के टुकड़े करना चाहे,
उन्नत में रोड़े अटकाये।
बिन शक्ति के उन लोगों के
सिर से भूत उतरना क्या।। वीरों…

मौत से वीर नहीं घबराते,
हंस-हंस कर फांसी चढ़ जाते।
आत्मा मरती नहीं है इसका,
जलना गलना सड़ना क्या।। वीरों…

हमें मिटाना चाहेंगे जो,
मिट्टी मे मिल जायेंगे वह।
नन्दलाल वीरों के आगे,
पापीजनों ने अड़ना क्या।। वीरों…