धन्य है तुझको ऐ ऋषि

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धन्य है तुझको ऐ ऋषि

धन्य है तुझको ऐ ऋषि,
तूने हमें जगा दिया,
सो सोके लुट रहे थे हम,
तूने हमें बचा दिया। धन्य है०

अंधो को आंखे मिल गई,
मुर्दों में जान आ गई।
जादू सा क्या चला दिया,
अमृत सा क्या पिला दिया। धन्य है०

तुझमें कुछ ऐसी बात थी,
कि तेरी बात पर ऋषि,
लाखों शहीद हो गये,
लाखों ने सर कटा दिया। धन्य है०

अपने लहू से लेखराम,
तेरी कहानी लिख गए,
हंस-हंस के हंसराज ने,
तन मन व धन लुटा दिया। धन्य है०

श्रद्धा से श्रद्धानंद ने,
सीने में खाई गोलियां,
तूने ही लाला लाजपत,
शेरे बबर बना दिया। धन्य है०

तेरे दीवाने जिस घड़ी,
दक्षिण दिशा को चल दिये,
हैरत में लोग रह गये,
दुनियां का दिल हिला दिया। धन्य है०