ओंकार प्रभु तेरा नाम
ओंकार प्रभु तेरा नाम,
गुण गावे संसार तमाम ।
तेरी महिमा गावे वेद,
तेरे जपे नb आवे खेद।।
सत् चित् आनन्द स्वरूप,
निराकर निर्भय अनूप ।
जग का स्वामी पालनहारा,
जग प्रकाशक व्यापक हारा।।
मन मांगे सुख भोग तमामी,
पूर्ण आनन्द देओ स्वामी।
वर्षा सुख की करो महेश,
तीन ताप हों दूर क्लेश ।।










