विशेष –
राम के दो विशेष गुण हैं-
सत्य कहना और सत्य करना।
रामोद्विर्नाभिभाषते – राम किसी
बात को दूसरी बार नहीं कहते।
राम तुम्हारा चरित स्वयं ही काव्य है।
कोई कवि बन जाय सहज संभाव्य है।।
सत्पुरुष, पुंगव सत्यवादी,
संयमी श्री राम थे।
प्रतिभा-निदान,
पराक्रमी धृतिशील सद्गुण धाम थे।।
परम प्रतापी, प्रजारञ्जन,
शत्रु विजयी वीर थे।
ज्ञानी, सदाचारी, सुधी,
धर्मज्ञ, दानी धीर थे।।
कल्याण कर उनके सभी
शुभलक्षणों को धार लो।
पढ़ मित्र पूर्ण-पवित्र
रामचरित्र जन्म सुधार लो।।










