मन सा न जग में प्रकाश कोई सच्चा मित्र।

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मन सा न जग में

मन सा न जग में
प्रकाश कोई सच्चा मित्र।
मन सा न कोई
और शत्रु हुड़दंगा है।
मन से ही रीत प्रीत
मन से ही शांति गीत।


मन ही से कलह
कपट द्वेष दंगा है।
मन ही मिलाता ईश,
मन ही दिलाता मुक्ति।
मन ही तो डालता
सुकर्म में अड़ंगा है।


मन है मरीज तो
लजीज कोई चीज नहीं।
मन यदि चंगा तो
कटौती में ही गंगा है।