ओंकार भजो अहंकार तजो

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ओंकार भजो अहंकार तजो

ओंकार भजो अहंकार तजो
अध्ययन समझो जो भई सो भई।
अभिमान गुमान तजो मन से,
मगरूर रहो मत यौवन से।
उपकार करो तन, मन, धन से,
जो गई सो गई जो रही सो रही। ओं०

दुःख देव दुखन पर मोक्ष करो,
और दीनन से मत विरोध करो।
परधन तिरिया देख न मोह करो,
अज हों सुधरो जो भई सो भई। ऑ०

श्रद्धा सत्कार के फूल चुनो,
पाखण्ड घमण्ड के फूल खनो।
उपदेश सुनो तुम आर्य बनो,
अब लों बस बेली भई सो भई। ऑ०

धन धाम को पाय न मान करो,
अज्ञान तजो और ज्ञान करो।
यह विनत ‘हजारी’ की मान करो,
जो बीती बिन अर्थ गई सो गई। ऑ०

जो बीत गई सो बीत गई,
बीत का शिकवा कौन करे
जब तीर कमां से निकल गई,
फिर तीर का पीछा कौन करे।