मुझमें ओ३म् तुझ में ओ३म् सब में ओ३म् समाया।

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मुझमें ओ३म् तुझ में ओ३म् सब में ओ३म् समाया।

मुझमें ओ३म् तुझ में
ओ३म् सब में ओ३म् समाया।
सब से करलो प्रीत जगत
में कोई नहीं पराया।
जितने ये संसार में प्राणी
सब में एक ही ज्योति।
एक बाग के फूल है सारे,
इक माला के मोती।
एक ही कारीगर ने सबको
इक माटी से बनाया ।।
सबसे करलो प्रेम…

एक बाप के बेटे हैं हम,
एक हमारी माता।
दाना पानी देने वाला,
एक हमारा दाता।
फिर ना जाने किस
मूर्ख ने लड़ना हमें सिखाया।।
सबसे करलो प्रेम….

छूतछात और भेदभाव की,
दीवारों को तोड़ें।
टूट गये हैं मन के मन्दिर,
प्रेम से इनको जोड़ें।
बदला जमाना हम भी बदले,
समय है ऐसा आया ।।
सबसे करलो प्रेम…