बातों ही बातों में बीती रे उमरिया।

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बातों ही बातों में बीती रे उमरिया।

बातों ही बातों में
बीती रे उमरिया।

तुझे होश न आया यों
ही वक्त गंवाया।।
किया कभी न भजन,
ओ मेरे मन। बातों ही…

बाल अवस्था यूँ ही गंवायी,
की बहुत नादानी।
होश रहा तुझे कुछ भी नहीं जब,
आई मस्त जवानी।
वृद्ध भयो जब सूझे कछुना,
यूँ ही गया यौवन बचपन,
ओ मेरे मन ।। बातों ही…

मानव तन मुश्किल से मिला है,
सबने ये ही बताया।
पर तूने अनमोल खजाना,
कौड़ी समझ लुटाया।
जान बूझकर अपने हाथों,
यू न लुटा तू अपना धन ।
ओ मेरे मन।। बातों ही…

मानव तन जिसने दिया तुझको,
उसको काहे भुलाया।
घट-घट में जो रमा हुआ है,
दिल में नाही बिठाया।
मन मंदिर में मनमोहन को,
बिठला करके मूँद नयन।।
ओ मेरे मन…