लगता है ईश्वर से यह मन कभी-कभी।

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लगता है ईश्वर से यह मन कभी-कभी।

लगता है ईश्वर से
यह मन कभी-कभी।
मिलती है सज्जनों की
संगत कभी-कभी ।।

लाखों जन्म गंवाये
इस जीव आत्मा ने।
मिलता है आदमी का
यह तन कभी-कभी।।
लगता है…

चलता तो रात-दिन
है जीवन की राहों में।
मिलती है आदमी को
मंजिल कभी-कभी ।।
लगता है…

दो घूंट जल का प्यासा
चातक है चाहता।
स्वाति में बरसता है
बादल कभी-कभी ।।
लगता है…

बेबस अगर जो कोई
प्राणों की भीख मांगे।
रखता है रहम दिल में
कातिल कभी-कभी ।।
लगता है…

लाखों जहाँ में आए,
लाखों चले गये।
दयानन्द सा न मिलता
रहवर कभी-कभी।।
लगता है…