आजा रे मानव प्रभु की शरण

0
28

आजा रे मानव प्रभु की शरण (तर्ज- बहुत प्यार करते हैं तुमको सनम)

आजा रे मानव प्रभु की शरण-२
उसी ने दिया तुझको यह नरतन।
उसी की कृपा से यह दुनिया बनी है-२
उसी की है रहमत जो धरती थमी है।
उसकी इनायत न है कुछ भी कम।
आजा रे मानव…

हमको दिये सुख के साधन हैं सारे-२
जीवन गुजारें हम जिनके सहारे।
करें क्यों शिकायत हम हर कदम।
आजा रे मानव…

उसी के इशारे को कुदरत है माने-२
जीवन नियम में हो हम सब ये जाने ।
संयमित करें अपने मन को भी हम।
आजा रे मानव…

करुणा के सागर पिता हैं हमारे-२
बुरे हैं भले हैं हम हैं तुम्हारे।
आंसू बहुत मेरे सुर है मद्धिम।
आजा रे मानव…

तेरी दया की जो बरसात होगी-२
भीगेगा तन-मन न कुछ याद होगी।
तेरे ही रंग में रंग जाये मन।
आजा रे मानव…