मानुष जन्म अमोल है
मानुष जन्म अमोल है
इसे माटी में न रोल रे।
अब तो मिला है फिर न मिलेगा,
कभी नहीं, कभी नहीं, कभी नहीं।।
सत्संग में तू जाया कर,
गीत प्रभु के गाया कर।
सांझ सबेरे बैठ के बन्दे,
हरि से ध्यान लगाया कर।
नहीं लगता कुछ मोल रे।।
माटी में न रोल रे। अब तो…
मतलब का संसार है,
न इसका एतवार है।
संभल संभल कर पैर धरो,
यह फूल नहीं अंगार है।
मन की आंखे खोल रे।।
माटी में न रोल रे। अब तो…
तू है बुलबुला पानी का,
न कर मान जवानी का।
नेक कमाई कर ले बन्दे,
पता नहीं जिन्दगानी का।
सबसे मीठा बोल रे।।
माटी में न रोल रे। अब तो…
प्रभु जी सर्वाधार है,
ज्ञान के भण्डार है।
जो कोई इनकी शरण में जावे,
कर दे बेड़ा पार है।
अपना जन्म संभाल रे।।
माटी में न रोल रे। अब तो…










