ऐ प्यारे मनवा पथ प्रभु का खोज के आना

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ऐ प्यारे मनवा पथ प्रभु का खोज के आना

तर्ज: ओ जानेवाले हो सके तो लौट के आना

ऐ प्यारे मनवा पथ प्रभु का खोज के आना
अज्ञान वश जीवन में कभी चोट ना खाना ॥

ये काम क्रोध लोभ मोह जीवन को सताए
और वैर ईर्ष्या द्वेष सबकी नजरों से गिराए
मन की मलीनता व दोष को मिटाना ॥ ऐ प्यारे…

मन से जो उठे वैर द्वेष मन को ही जलाए
कृष्णा की भूख ही तुझे लोभी पतित बनाए

मन को विषय विकारों में तू ना उलझाना ॥ ऐ प्यार…

मंजिल का राही आत्मा दुनियाँ अजब सराय
हर इक कदम समझ के सोच के अगर बढ़ाए
तो जीवन में कभी पड़ेगा ना पछताना ॥ ऐ प्यारे..

आत्मा के लिए प्रभु ने देह के मका बनाए
खाली किया मक चुकाने को न थे किराए
दर दर की ठोकरें हैं और आना जाना ॥ ऐ प्यारे…

ये वेद तुझको सत्य मार्ग ही सदा बतायें
दुर्गण को दूर करके सद्‌गुणों से मन सजाए
वेदों को पद पढ़ाना सुनना सुनाना ॥ ऐ प्यारे…

श्रद्धा व प्रेम से हृदय प्रभु के गीत गाए
मन प्रेम से प्रभु मिलन की भावना जगाए
हर स्वर में रंग तरंग में प्रभु गीत गाना ॥ ऐ प्यारे…

ऋषि साधु सन्त योगी सब प्रभु शरण में आए
आशीश प्रभु से पाके अमृत पुत्र कहलाए
जिस पथ महापुरुष गए उस ओर जाना ॥ ऐ प्यारे…

अग्निस्वरूप भाव क्यों ना आत्मा जगाए
तू इन्द्रियों को वश में कर आनन्द क्यूँ ना पाए
आत्मा को प्रभु के प्रेम का अमृत पिलाना ॥ ऐ प्यारे..

(पतित) गिरा हुआ (सराय) राह में ठहरने का स्थान (मक) घर, मकान