मैं तो जानू ना कुछ मेरा
तर्ज: मैं तो तुम संग नैन मिलाके
मैं तो जानू ना कुछ मेरा
सब प्रभु की रचना
प्रभु को बना ले अपना ॥ मैं तो जानूँ
लोभ मोह मद में भरमाया
मृगतृष्णा में कुछ ना पाया
सारा जीवन व्यर्थ गँवाया ॥ मैं तो जानूँ
संगी साथी मीत बनाया
वक्त पड़ा कोई काम न आया
क्यों न प्रभु को मीत बनाया ॥ मैं तो जानूँ
सपनों का जो महल बनाया
नींद खुली तो खण्डहर पाया
मन का मन्दिर काम न आया ॥ मैं तो जानूँ ॥
तनकर क्यों अभिमान बढ़ाया
दुनियाँ फानी जान न पाया
अन्त समय रोया पछताया ॥ मैं तो जानूँ ॥
अब भी क्या तू जाग न पाया
झूठ फरेब क्यों छोड़ न पाया
मान जा, कर ना जीवन जाया ॥ मैं तो जानूँ ॥










