रैन देखी ना देखा प्रभात
तर्ज – जाने कितने दिनों के बाद……
रैन देखी ना देखा प्रभात,
ये दिल विषयों में रहा।
तेरे मन में रहा उत्पात,
ये दिल विषयों में रहा।।
रोज़ तुझे कितना समझाया
तेरी “सचिन” समझ ना आया
ना दिन देखा ना रात,
ये दिल विषयों में रहा रैन देखी………
जीवों पे तू छुरियां चलाता,
भारी पाप ये कितना कमाता
ना मानी कभी सद्द्घात,
ये दिल विषयों में रहा रैन देखी……
कैसे अपना दुःख ये बतायें,
कोई लफ्ज़ ये बोल ना पायें
जीवनकर इनका समाप्त,
ये दिल विषयों में रहा रैन देखी……
नादाँ है ये जीव बेचारे,
जाते हैं निर्दोष ये मारे ना समझ सका
हालात, ये दिल विषयों में
रहा रैन देखी……….










