तर्ज – संसार है एक नदिया……
भगवान मैं जीवन में,
गुणगान तेरा गाऊँ।
भक्ति से तेरी भगवन,
मंज़िल अपनी पाऊँ।
जगदीश हवन संध्या,
नित्य हो कर्म मेरा मद् लोभ
अहम ना कभी,
डाले आकर घेरा जीवन हो
“सचिन” ऐसा, सबके मन को भाऊँ
भक्ति से तेरी………..
संसार में आया हूँ,
एक तेरा सहारा है
मझधार में नैंया है,
बड़ी दूर किनारा है
वरदान मुझे दे दो,
भवसागर तर जाऊँ
भक्ति से तेरी………….
खुश्बू से तेरी महके,
जीवन रूपी बगिया
तेरा नाम नहीं भूलूं,
जीवन में हो खुशियाँ
सुबह-शाम तेरा भगवन,
मैं नग्मा दोहराऊँ
भक्ति से तेरी………….
संसार की उलझन में,
कहीं उलझ ना जाये
मन पापों से दूर रहूँ,
उपकार का हो जीवन
चरणों में तेरे आकर,
पद मोक्ष अमर पाऊँ
भक्ति से तेरी………….










