उस प्रभु का गर भजन ना गायेगा।

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उस प्रभु का गर भजन ना गायेगा।

तर्ज – दिल के अरमा……..

उस प्रभु का,
गर भजन ना गायेगा।
दिल के अरमां,
दिल में लेके जायेगा।।

1 बचपना तो खेल में
बीता तेरा वो समय अब
लौटके ना आयेगा दिल के……

ना “सचिन” चारा चलेगा
फिर तेरा दिल के ग़म खुशियाँ
भी कह ना पायेगा दिल के……

ये जवानी चार दिन
का खेल है खेलकर
मस्ती में फिर पछतायेगा दिल के……

चार दिन की चाँदनी
के बाद फिर देखना
प्यारे दिल के…… अंधेरा छायेगा