नीले पर्वतों की धारा
तर्ज – नीले पर्वतों की धारा…….
नीले पर्वतों की धारा,
झीलों का जल वो खारा।
सब कह रहे हैं,
प्रभु का सहारा चाहिए
हमदम हमारा चाहिए……..
लिखेगा “सचिन” क्या,
गुणों की वो खान है
दूसरा ना कोई जग में,
प्रभु के समान है वो
सबका खेवन हारा,
लगता है सबको प्यारा
सब कह रहे, प्रभु…….
सुन्दर सुरीले नगमे,
पंछी जो गा रहे प्रभु
वो महान है, गाकर सुना रहे
वो दाता सबसे न्यारा,
वो सबका पालनहारा
सब कह रहे, प्रभु……..
हजारों खिलायीं कलियाँ,
देख लो चमन में महकते हैं
फूल कैसे, वन-उपवन में
क्या रंगी खूब नज़ारा,
जग में है सकल पसारा
सब कह रहे, प्रभु……..
कतारें जो मोर की,
वनों में विचरती हैं
लगता है खूब क्या,
नूर वो कुदरती है
किस भाँति रूप निखारा,
हर आदमी है हारा
सब कह रहे, प्रभु……..










