प्रभु का नाम जो इन्साँ,सवेरे शाम गाता है।
तर्ज – बेदर्दी बालमा……
प्रभु का नाम जो इन्साँ,
सवेरे शाम गाता है।
मनाता है सदा खुशियाँ,
अमर वो मोक्ष पाता है।
गये आदेश देकर के,
अग्नि वायु व अंगिरा “सचिन” है
ये तेरा जीवन, बड़ा ही कीमती
हीरा प्रभु की तू शरण में आ,
अरे क्यूँ मन फँसाता है
प्रभु का नाम………..
कोई पापी कभी दिल से,
कोई जब पाप करता है
गुनाह दिन रात करता है,
ना वो जुल्मों से डरता है
प्रभु कितना दयालु है,
दया करके दिखाता है
प्रभु का नाम……….
जुबाँ से कह नहीं सकते,
जिन्हें तुम मारते निसदिन
बनाकर स्वाद रसना का,
जिन्हें खाते हो प्रतिदिन
तेरे बच्चे भी तड़फेंगे,
तू जब इनको रूलाता है
प्रभु का नाम……
सता निर्दोष जीवों को,
नहीं सुख से तू सोयेगा मिलेगा
फल प्रभु से जब, छुपाकर
मुँह तू रोयेगा बहाकर
खून पशुओं का,
अरे क्यूँ जश्न मनाता है
प्रभु का नाम……










