माता मेरी बस इतना बता

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माता मेरी बस इतना बता

तर्ज – तेरी याद में जलकर…… (अपनी ही निगाहों से……)

(माँ के गर्भ में बेटी हाथ जोड़कर माँ से विनती करती है और अपने जीवन की भीख मांगती है।)

माता मेरी बस इतना बता,
मुझ पे ये सितम क्यूँ ढाती है।
माँ तेरे ज़िगर का टुकड़ा हूँ,
क्यूँ मुझको तू मरवाती है।

मैं हाथ जोड़कर कहती हूँ,
ना तुम कातिल मेरी बनना-2
ये गीत सचिन “सारंग” माँ को,
बेटी रो-रो के सुनाती है माता मेरी……

अरमान है मेरे भी कुछ तो,
संसार में आने दे मुझको-2
चुपके-चुपके क्यूँ छुरियाँ तू,
गर्दन पे मेरी चलवाती है
माता मेरी………

भैया की कलाई पर मैं भी,
सुन्दर सी राखी बाँधूंगी-2
करके भाई से दूर मुझे,
नाली में क्यूँ फिकवाती है
माता मेरी………

आँगन में खेलूँगी घर के,
जीवन में खुशी तुझे दूँगी-2
संसार में आने दे मुझको,
क्यूँ सर पे पाप चढ़ाती है
माता मेरी……….

एक दिन वो पल भी आयेगा,
मैं बाबुल का घर छोडूंगी-2
बाबुल के घर से हर बेटी,
एक दिन तो विदा हो जाती है
माता मेरी………