भइयन को तिलक लगा रही रे
इस गीत की टेक व एक कली आदरणीय श्री अमर राम शर्मा ‘दयानन्दी’ जी ३ लिखी है और बाकी सारी कलियाँ मैंने लिखी हैं (सारंग)
भइयन को तिलक लगा रही रे,
छोटी सी बहनियाँ।
कर में कंगनवा पहना रही रे,
छोटी सी बहनियाँ।।
एक कली “दयानन्दी” से ली
बाकी तो सब “सचिन”,
ने लिख दी सबकी,
छोटी धीर बँधा रही रे,
सी भइयन को तिलक…… बहनियाँ
मोंको बिछड़वे का गम
नेक न भैया जानें
क्यूँ अखियन में आ गयी
तरैया लड़वन का,
भोग लगा रही रे,
छोटी सी भइयन को तिलक…….. बहनियाँ
अगले जन्म में मिलेंगे रे भइया
आँगन में फुलवा खिलेंगे रे भइया
रो-रो के, आँसू बहा रही रे,
छोटी सी भइयन को तिलक……. बहनियाँ
अगली बार वादा ना तोड़ना मुझको रे
रोती ना छोड़ना गा-गा के,
गीत सुना रही रे,
छोटी सी भइयन को तिलक…… बहनियाँ
अपनी माँ को भी समझाये
ऐसा वीर माँ हर कोई जाये
वीरता का, सबक सिखा रही रे,
छोटी सी भइयन को तिलक…… बहनियाँ










