करतार मेरा वो,भरतार मेरा वो, वो ही सूरज की

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करतार मेरा वो,भरतार मेरा वो, वो ही सूरज की

तर्ज – मेरा प्यार भी तू है……

करतार मेरा वो,
भरतार मेरा वो वो ही सूरज की,
है रोशनी में वो ही सितारों में करतार

नीले-नीले, इस अम्बर में,
वो ही दाता है रे छाया गरजे बिजली,
बरसे बादल, ये भी उसकी “सचिन” रे
माया ना पहचान तू पाया
करतार मेरा वो…………

मंदिर ढूंढ़ा, मस्जिद ढूंढ़ी,
ढूंढ़ लिया गिरजाघर सारा काशी में,
हरिद्वार में ढूंढ़ा,
ना वो दाता मिला है प्यारा है
वो सबसे न्यारा करतार मेरा वो……

उसकी ही, ज्योति से रोशन,
है जहाँ रंगीन ये सारा जग में सारे,
फैला है ये, देख उसी का
सकल पसारा है उसी का उजियारा
करतार मेरा वो……