माँ कली हूँ तेरे गुलशन की

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माँ कली हूँ तेरे गुलशन की

तर्ज – 1-तेरी याद में जलकर देख……

माँ के गर्भ में बच्या पल रहा है माँ ने जांच करायी तो लड़की की पुष्टि हुई हब मैं इस माँ डॉक्टर से सफाई की बात करती है और कहती है कि डॉक्टर साहब बच्चे को नहीं चाहती कि ये दुनिया में आये, तो उसी दिन रात को यह वेवं अपनी माँ के सपने में आती है और हाथ जोड़कर कुछ यूँ कहती है-

माँ कली हूँ तेरे गुलशन की,
गर तू ही मुझे मिटायेगी
ये बगिया पहले खाली थी,
और ख़ाली ही रह जायेगी।

बेटी का होना पाप नहीं,
ओ सचिन “सारंग” अभिशाप नहीं- (1)
दरबार में उस परमेश्वर के,
ये पाप रे होगा माफ़ नह
ये गीत निर्भय सुनकर भाई,
हर माता अश्क बहायेगी
माँ कली हूँ…………

माँ इतना मन में सोच जरा,
तू भी तो किसी की बेटी है- (1)
तेरा पालन पोषण माँ ने किया,
तू भी माँ के गर्भ में लेटी है
जीवन को मिटाकर तू मेरे,
माँ रोयेगी पछतायेगी
माँ कली हूँ……..

माँ भैया को तू चाहती है,
ना मुझे गले से लगाती है-(1)
भाई की चाहत में माता,
तू मुझे मारना चाहती है
मुझको यूँ मिटाकर के माता,
तू सुख से ना जी पायेगी
माँ कली हूँ………

बेटा तो होगा तेरा ही,
पर भाई तो होगा मेरा-(1)
आयेगा वो पल भी एक दिन,
उसके सर पे होगा सेहरा
ये बहन भी उसकी शादी की,
हृदय से खुशी मनायेगी
माँ कली हूँ……….